UP Top News पाकिस्तान का भारत पर टिड्डी अटैक Pakistan grasshopper attack on India, crops eat equal to 10 elephants in 24 hours, ऐसे करें बचाव

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पाकिस्तान का भारत पर टिड्डी अटैक, 24 घंटे में 10 हाथियों के खाने के बराबर टिड्डी खा जाते हैं फसल, ऐसे करें बचाव

Aligarh(AKK news): After Punjab, Rajasthan, the state government has also become alert about the locust party from Pakistan. From the Government level, letters have been issued to all the districts for this by Amit Mohan Prasad, Principal Secretary, Agriculture Department. In this, instructions have been given to make farmers aware in advance. The government also held five meetings with the Agriculture Department of Pakistan. Pakistan was declared a national disaster for this crisis. There too, this is the first time when a team of locusts reached Khyber Pakhtun after Sindh and Punjab. It consumes the same amount of food as 10 elephants in 24 hours.

Farmers should control this by grasshopper
Control measures: DM has issued a letter for farmers’ awareness. In this, control measures have been given in case of locust outbreak. The DM has said that it is very difficult to control the locust attack. Spraying of toxic drugs has to be done by airplane. It is most useful to destroy them by dropping them in water and kerosene. Torches can also be controlled by burning torches around the fields in the evening.

Control by lighting a torch around the fields
The beneficiaries of Prime Minister Kisan Samman Nidhi will now get the benefit of KCC (Kisan Credit Card). For this, a 15-day special campaign has started from Saturday. Lead bank manager said that the beneficiaries of Kisan Samman Nidhi, who have not been made KCC, will be created by campaigning. If someone is already made, he can increase the limit. According to DM, it is most useful to destroy grasshoppers in water and kerosene. Torches can also be controlled by burning torches around the fields in the evening.

In 24 hours, 10 elephants eat equal amount of food
Among the 10 species of locusts worldwide, 4 desert locusts are less visible in migratory Bombay and tree locusts in India. Travel a distance of 70 to 80 km in a day. In many states in India, the attacks of locust parties have surprised the scientists even during the winter season. It is a matter of concern that climate change also changes the behavior of animals. The persistence of locusts till January and February is being linked to this reason. Locust parties can be seen attacking farming in many areas in Pakistan.

Desert locust parties attack
Bihari Lal, a BJP MLA from Bikaner, Rajasthan, reached the attention of the House with a basket full of locusts in the Rajasthan Assembly. In the Rajya Sabha, on 26 July 2019, Union Agriculture Minister Narendra Singh Tomar, in response to a question, had said that the desert locust parties were attacked in Jaisalmer area from 21 May 2019 and later expanded to several districts.

Meeting with Government of Pakistan
In a dozen districts in Rajasthan, for the last nine months, they caused heavy damage to crops on more than seven lakh hectares of land. However, in Rajasthan, spraying of medicines was done in one lakh four lakh hectare area. The government also held five meetings with the Agriculture Department of Pakistan. Pakistan was declared a national disaster for this crisis. There too, this is the first time when a team of locusts reached Khyber Pakhtun after Sindh and Punjab.

पाकिस्तान का भारत पर टिड्डी अटैक, 24 घंटे में 10 हाथियों के खाने के बराबर खा जाते हैं फसल
पाकिस्तान से आए टिड्डी दल को लेकर पंजाब, राजस्थान के बाद प्रदेश सरकार भी अलर्ट हो गई है। शासन स्तर से कृषि विभाग के प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद की ओर से इसके लिए सभी जिलों को पत्र जारी किए गए हैं। इसमें किसानों को पहले से ही जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने पाकिस्तान के कृषि विभाग के साथ भी पांच बार बैठकें कीं। इस संकट को लेकर पाकिस्तान में तो राष्ट्रीय आपदा तक घोषित कर दी गई। वहां भी यह पहला मौका है जब सिंध और पंजाब के बाद खैबर पख्तून तक में टिड्डियों का दल पहुंच गया। यह 24 घंटे में 10 हाथियों के खाने के बराबर फसल खा जाते हैं।ajkikhabar.com

ऐसे करें नियंत्रण
नियंत्रण के उपाय : डीएम ने किसानों की जागरूकता के लिए पत्र जारी किया है। इसमें टिड्डी का प्रकोप दिखाई देने पर नियंत्रण के उपाय बताए हैं। डीएम ने कहा है कि टिड्डी का आक्रमण होने पर नियंत्रण पाना काफी मुश्किल है। हवाई जहाज से विषैली औषधियों का छिड़काव करना पड़ता है। इन्हें पानी और मिट्टी के तेल में गिराकर नष्ट करना सबसे उपयोगी होता है। शाम के समय खेतों के चारों ओर मशाल जलाकर भी नियंत्रण किया जा सकता है। ajkikhabar.com

किसान सम्मान वालों को केसीसी का लाभ
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों को अब केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) का लाभ मिलेगा। इसके लिए शनिवार से 15 दिन के विशेष अभियान की शुरुआत हो गई है। लीड बैंक मैनेजर ने बताया कि किसान सम्मान निधि वाले जिन लाभार्थियों के केसीसी नहीं बने हैं, अभियान चलाकर बनाए जाएंगे। अगर किसी का पहले से बना है तो वह लिमिट बढ़वा सकता है। डीएम के अनुसार टिड्डी पानी और मिट्टी के तेल में गिराकर नष्ट करना सबसे उपयोगी होता है। शाम के समय खेतों के चारों ओर मशाल जलाकर भी नियंत्रण किया जा सकता है। ajkikhabar.com

24 घंटे में 10 हाथियों के खाने के बराबर खा जाते हैं फसलajkikhabar.com
विश्‍व भर में टिड्डियों की 10 प्रजातियों में से 4 रेगिस्तानी टिड्डी प्रवासी बॉम्बे और ट्री टिड्डी भारत में कम दिखती हैं। एक दिन में 70 से 80 km की की दूरी तय करते हैं। भारत में कई राज्यों में सर्दी के मौसम में भी टिड्डी दलों के हमलों ने वैज्ञानिकों को हैरत में डाल दिया है। जलवायु परिवर्तन से जीव-जंतुओं के व्यवहार में भी बदलाव आना चिंता की बात है। जनवरी और फरवरी तक टिड्डियों का प्रकोप बने रहने को इस कारण से जोड़ कर देखा जा रहा है। पाकिस्तान में कई क्षेत्रों में खेती-बाड़ी पर टिड्डी दलों का हमला देखा जा सकता है। ajkikhabar.com

रेगिस्तानी टिड्डी दलों का आक्रमण हुआ
राजस्‍थान के बीकानेर के भाजपा विधायक बिहारी लाल राजस्थान विधानसभा में टिड्डियों से भरी टोकरी के साथ सदन का ध्यान दिलाने पहुंचे तो यह मुददा मीडिया में छा गया। राज्यसभा में 26 जुलाई 2019 को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक सवाल के जवाब में माना था कि जैसलमेर इलाके में 21 मई 2019 से रेगिस्तानी टिड्डी दलों का आक्रमण हुआ और बाद में इसका कई जिलों में विस्तार हुआ। ajkikhabar.com

पाकिस्‍तान सरकार के साथ की बैठक
राजस्थान में एक दर्जन जिलों में पिछले नौ महीनों तक सात लाख हेक्टेयर से अधिक भू-भाग पर फसलों को भारी नुकसान इन्होंने पहुंचाया। हालांकि राजस्थान में पौने चार लाख हेक्टेयर इलाके में दवाओं का छिड़काव भी हुआ। सरकार ने पाकिस्तान के कृषि विभाग के साथ भी पांच बार बैठकें कीं। इस संकट को लेकर पाकिस्तान में तो राष्ट्रीय आपदा तक घोषित कर दी गई। वहां भी यह पहला मौका है जब सिंध और पंजाब के बाद खैबर पख्तून तक में टिड्डियों का दल पहुंच गया। ajkikhabar.com

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